أَخْبَرَنَا عَمْرُو بْنُ عَلِيٍّ، قَالَ حَدَّثَنَا يَحْيَى، عَنْ أَشْعَثَ، عَنِ الْحَسَنِ، عَنْ أَبِي بَكْرَةَ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم أَنَّهُ صَلَّى صَلاَةَ الْخَوْفِ فَصَلَّى بِالَّذِينَ خَلْفَهُ رَكْعَتَيْنِ وَبِالَّذِينَ جَاءُوا رَكْعَتَيْنِ فَكَانَتْ لِلنَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم أَرْبَعًا وَلِهَؤُلاَءِ رَكْعَتَيْنِ رَكْعَتَيْنِ .
It was narrated from Abu Bakr that the Prophet (ﷺ) offered the fear prayer (Salat Al-Khauf). He led those who were behind him in two Rak'ah and those who came (after them) in two Rak'ah, so the Prophet (ﷺ) prayed four Rak'ahs and each group prayed two
स्रोत में दर्ज दर्जे
SahihAbu Ghuddah
SahihAl-Albani
Sahih Witness Sahih Muslim (843/ 312)Zubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।