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सुनन नसाई

नंबर 787

नंबर 787किताब 10, नंबर 11
أَخْبَرَنَا سُوَيْدُ بْنُ نَصْرٍ، قَالَ أَنْبَأَنَا عَبْدُ اللَّهِ، عَنْ أَبَانَ بْنِ يَزِيدَ، قَالَ حَدَّثَنَا بُدَيْلُ بْنُ مَيْسَرَةَ، قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو عَطِيَّةَ، مَوْلًى لَنَا عَنْ مَالِكِ بْنِ الْحُوَيْرِثِ، قَالَ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ ‏ "‏ إِذَا زَارَ أَحَدُكُمْ قَوْمًا فَلاَ يُصَلِّيَنَّ بِهِمْ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated that Malik bin Al-Huwairith said:"I heard the Messenger of Allah (ﷺ) say: 'When any one of you visits some people,he should not lead them in prayer
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 10 · The Book of Leading the Prayer (Al-Imamah)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।