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सुनन नसाई

नंबर 783

नंबर 783किताब 10, नंबर 7
أَخْبَرَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ مُحَمَّدٍ التَّيْمِيُّ، قَالَ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ، عَنْ شُعْبَةَ، عَنْ إِسْمَاعِيلَ بْنِ رَجَاءٍ، عَنْ أَوْسِ بْنِ ضَمْعَجٍ، عَنْ أَبِي مَسْعُودٍ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ لاَ يُؤَمُّ الرَّجُلُ فِي سُلْطَانِهِ وَلاَ يُجْلَسُ عَلَى تَكْرِمَتِهِ إِلاَّ بِإِذْنِهِ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated that Abu Masud said:"The Messenger of Allah (ﷺ) said: 'A man should not be led in prayer in his place of authority, and no one should sit in his place of honor except with his permission
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 10 · The Book of Leading the Prayer (Al-Imamah)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।