أَخْبَرَنَا قُتَيْبَةُ، عَنْ مَالِكٍ، عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ حُمْرَانَ، مَوْلَى عُثْمَانَ أَنَّ عُثْمَانَ، - رضى الله عنه - قَالَ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ " مَا مِنِ امْرِئٍ يَتَوَضَّأُ فَيُحْسِنُ وُضُوءَهُ ثُمَّ يُصَلِّي الصَّلاَةَ إِلاَّ غُفِرَ لَهُ مَا بَيْنَهُ وَبَيْنَ الصَّلاَةِ الأُخْرَى حَتَّى يُصَلِّيَهَا " .
Uthman said:"I heard the Messenger of Allah (ﷺ) say: 'There is no man who performs Wudu' and does it well, then prays, but when he prays it, he will be forgiven whatever (sins he commits) between that and the next prayer
स्रोत में दर्ज दर्जे
SahihAbu Ghuddah
SahihAl-Albani
Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।