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सहीह मुस्लिम

नंबर 7319

नंबर 7319
وَحَدَّثَنِي زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الصَّمَدِ بْنُ عَبْدِ الْوَارِثِ، حَدَّثَنَا أَبِي، حَدَّثَنَا دَاوُدُ، عَنْ أَبِي نَضْرَةَ، عَنْ أَبِي سَعِيدٍ، وَجَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ، قَالاَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ يَكُونُ فِي آخِرِ الزَّمَانِ خَلِيفَةٌ يَقْسِمُ الْمَالَ وَلاَ يَعُدُّهُ ‏"‏ ‏.‏
Abu Sa'id and Jabir b. Abdullah reported that Allah's Messenger (ﷺ) said:There would be in the last phase of the time a caliph who would distribute wealth but would not count

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किसी किताब में नहीं रखी गईं

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।