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सहीह मुस्लिम

नंबर 6961

नंबर 6961
حَدَّثَنَا هَدَّابُ بْنُ خَالِدٍ، حَدَّثَنَا هَمَّامٌ، حَدَّثَنَا قَتَادَةُ، عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ لَلَّهُ أَشَدُّ فَرَحًا بِتَوْبَةِ عَبْدِهِ مِنْ أَحَدِكُمْ إِذَا اسْتَيْقَظَ عَلَى بَعِيرِهِ قَدْ أَضَلَّهُ بِأَرْضِ فَلاَةٍ ‏"‏ ‏.‏ وَحَدَّثَنِيهِ أَحْمَدُ الدَّارِمِيُّ، حَدَّثَنَا حَبَّانُ، حَدَّثَنَا هَمَّامٌ، حَدَّثَنَا قَتَادَةُ، حَدَّثَنَا أَنَسُ بْنُ، مَالِكٍ عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم بِمِثْلِهِ ‏.‏
Anas b. Malik reported that Allah's Messenger (ﷺ) said:Allah is more pleased with the repentance of His servant than if one of you gets up and he finds his camel missing in a waterless desert (and then he accidentally finds it). This hadith has been narrated on the authority of Anas b. Malik through another chain of transmitters

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किसी किताब में नहीं रखी गईं

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।