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सहीह मुस्लिम

नंबर 2027

नंबर 2027किताब 7, नंबर 77अरबी नंबरिंग 877.02
وَحَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ، وَأَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ قَالاَ حَدَّثَنَا حَاتِمُ بْنُ إِسْمَاعِيلَ، ح وَحَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الْعَزِيزِ، - يَعْنِي الدَّرَاوَرْدِيَّ - كِلاَهُمَا عَنْ جَعْفَرٍ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي رَافِعٍ، قَالَ اسْتَخْلَفَ مَرْوَانُ أَبَا هُرَيْرَةَ ‏.‏ بِمِثْلِهِ غَيْرَ أَنَّ فِي، رِوَايَةِ حَاتِمٍ فَقَرَأَ بِسُورَةِ الْجُمُعَةِ فِي السَّجْدَةِ الأُولَى وَفِي الآخِرَةِ ‏{‏ إِذَا جَاءَكَ الْمُنَافِقُونَ‏}‏ وَرِوَايَةُ عَبْدِ الْعَزِيزِ مِثْلُ حَدِيثِ سُلَيْمَانَ بْنِ بِلاَلٍ ‏.‏
This hadith is narrated by Abdullah b. Abu Rafi' with the same chain of transmitters but with this modification:" That he recited Surah Jumu'a (lxii.) in the first rak'ah and" The hypocrites came" in the second rak'ah

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 7 · The Book of Prayer - Friday

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।