सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह मुस्लिम

नंबर 2004

नंबर 2004किताब 7, नंबर 54अरबी नंबरिंग 866.02
وَحَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، وَابْنُ، نُمَيْرٍ قَالاَ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بِشْرٍ، حَدَّثَنَا زَكَرِيَّاءُ، حَدَّثَنِي سِمَاكُ بْنُ حَرْبٍ، عَنْ جَابِرِ بْنِ سَمُرَةَ، قَالَ كُنْتُ أُصَلِّي مَعَ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم الصَّلَوَاتِ فَكَانَتْ صَلاَتُهُ قَصْدًا وَخُطْبَتُهُ قَصْدًا ‏.‏ وَفِي رِوَايَةِ أَبِي بَكْرٍ زَكَرِيَّاءُ عَنْ سِمَاكٍ
Jabir b. Samura reported:I used to observe prayer with the Messenger of Allah (ﷺ) and his prayer was of moderate length and his sermon too was of moderate length

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 7 · The Book of Prayer - Friday

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।