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सहीह मुस्लिम

नंबर 1969

नंबर 1969किताब 7, नंबर 19अरबी नंबरिंग 852.01
وَحَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ يَحْيَى، قَالَ قَرَأْتُ عَلَى مَالِكٍ ح وَحَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ، عَنْ مَالِكِ بْنِ أَنَسٍ، عَنْ أَبِي الزِّنَادِ، عَنِ الأَعْرَجِ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ذَكَرَ يَوْمَ الْجُمُعَةِ فَقَالَ ‏ "‏ فِيهِ سَاعَةٌ لاَ يُوَافِقُهَا عَبْدٌ مُسْلِمٌ وَهُوَ يُصَلِّي يَسْأَلُ اللَّهَ شَيْئًا إِلاَّ أَعْطَاهُ إِيَّاهُ ‏"‏ ‏.‏ زَادَ قُتَيْبَةُ فِي رِوَايَتِهِ وَأَشَارَ بِيَدِهِ يُقَلِّلُهَا
Abu Huraira reported Allah's Messenger (ﷺ) as saying:There is a time on Friday at which no Muslim servant would pray and would ask Allah for a thing (that is good) but He would give it to him. Qutaiba pointed with the help of his hand that it (the time) is short

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 7 · The Book of Prayer - Friday

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।