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सहीह मुस्लिम

नंबर 1940

नंबर 1940किताब 6, नंबर 368अरबी नंबरिंग 838.01
وَحَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا أَبُو أُسَامَةَ، وَوَكِيعٌ، عَنْ كَهْمَسٍ، قَالَ حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ بُرَيْدَةَ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مُغَفَّلٍ الْمُزَنِيِّ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ بَيْنَ كُلِّ أَذَانَيْنِ صَلاَةٌ - قَالَهَا ثَلاَثًا قَالَ فِي الثَّالِثَةِ - لِمَنْ شَاءَ ‏"‏ ‏.‏
Abdullah b. Mughaffal reported Allah's Messenger (ﷺ) u saying:There Is between the two calls (Adhan and Iqama) a prayer. And he mentioned it three times, and at the third time he said: This applies to those who wish to do it

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 6 · The Book of Prayer - Travellers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।