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सहीह मुस्लिम

नंबर 1914

नंबर 1914किताब 6, नंबर 342अरबी नंबरिंग 823.01
حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ يُونُسَ، حَدَّثَنَا زُهَيْرٌ، حَدَّثَنَا أَبُو إِسْحَاقَ، قَالَ رَأَيْتُ رَجُلاً سَأَلَ الأَسْوَدَ بْنَ يَزِيدَ وَهُوَ يُعَلِّمُ الْقُرْآنَ فِي الْمَسْجِدِ فَقَالَ كَيْفَ تَقْرَأُ هَذِهِ الآيَةَ فَهَلْ مِنْ مُدَّكِرٍ أَدَالاً أَمْ ذَالاً قَالَ بَلْ دَالاً سَمِعْتُ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ مَسْعُودٍ يَقُولُ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ ‏ "‏ مُدَّكِرٍ ‏"‏ ‏.‏ دَالاً ‏.‏
Abu Ishaq reported:I saw a man asking Aswad b. Yazid who taught the Qur'an in the mosque: How do you recite the verse (fahal min muddakir) whether (the word muddakir) Is with (d) or (dh)? He (Aswad) said: It was with (d). I heard Abdullah b. Mas'ud saying that he had heard the Messenger of Allah (ﷺ) reciting (muddakir) with (d)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 6 · The Book of Prayer - Travellers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।