सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह मुस्लिम

नंबर 1910

नंबर 1910किताब 6, नंबर 338अरबी नंबरिंग 822.03
وَحَدَّثَنَاهُ إِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، أَخْبَرَنَا عِيسَى بْنُ يُونُسَ، حَدَّثَنَا الأَعْمَشُ، فِي هَذَا الإِسْنَادِ ‏.‏ بِنَحْوِ حَدِيثِهِمَا وَقَالَ إِنِّي لأَعْرِفُ النَّظَائِرَ الَّتِي كَانَ يَقْرَأُ بِهِنَّ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم اثْنَتَيْنِ فِي رَكْعَةٍ ‏.‏ عِشْرِينَ سُورَةً فِي عَشْرِ رَكَعَاتٍ ‏.‏
This hadith has been narrated by A'mash with the same chain of transmitters in which ('Abdullah b. Mas'ud) said:" I know the manners in which the Messenger of Allah (ﷺ) recited the two surahs in one rak'ah and then twenty surahs in ten rak'ahs

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 6 · The Book of Prayer - Travellers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।