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सहीह मुस्लिम

नंबर 1900

नंबर 1900किताब 6, नंबर 328अरबी नंबरिंग 818.02
وَحَدَّثَنِي حَرْمَلَةُ بْنُ يَحْيَى، أَخْبَرَنَا ابْنُ وَهْبٍ، أَخْبَرَنِي يُونُسُ، عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، أَخْبَرَنِي عُرْوَةُ بْنُ الزُّبَيْرِ، أَنَّ الْمِسْوَرَ بْنَ مَخْرَمَةَ، وَعَبْدَ الرَّحْمَنِ بْنَ عَبْدٍ الْقَارِيَّ، أَخْبَرَاهُ أَنَّهُمَا، سَمِعَا عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ، يَقُولُ سَمِعْتُ هِشَامَ بْنَ حَكِيمٍ، يَقْرَأُ سُورَةَ الْفُرْقَانِ فِي حَيَاةِ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏.‏ وَسَاقَ الْحَدِيثَ بِمِثْلِهِ وَزَادَ فَكِدْتُ أُسَاوِرُهُ فِي الصَّلاَةِ فَتَصَبَّرْتُ حَتَّى سَلَّمَ ‏.‏
This hadith has been transmitted thus by 'Umar b. Khattab (with a slight change of words):" I heard Hisham b. Hakim reciting Surah al-Furqan during the lifetime of Allah's Messenger (ﷺ)." The rest is the same but with this addition:" I was about to catch hold of him in prayer, but I exercised patience till he pronounced salutation

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 6 · The Book of Prayer - Travellers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।