सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह मुस्लिम

नंबर 1887

नंबर 1887किताब 6, नंबर 315अरबी नंबरिंग 811.02
وَحَدَّثَنَا إِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَكْرٍ، حَدَّثَنَا سَعِيدُ بْنُ أَبِي عَرُوبَةَ، ح وَحَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا عَفَّانُ، حَدَّثَنَا أَبَانٌ الْعَطَّارُ، جَمِيعًا عَنْ قَتَادَةَ، بِهَذَا الإِسْنَادِ ‏.‏ وَفِي حَدِيثِهِمَا مِنْ قَوْلِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ إِنَّ اللَّهَ جَزَّأَ الْقُرْآنَ ثَلاَثَةَ أَجْزَاءٍ فَجَعَلَ قُلْ هُوَ اللَّهُ أَحَدٌ جُزْءًا مِنْ أَجْزَاءِ الْقُرْآنِ ‏"‏ ‏.‏
This hadith has been narrated by Qatada with the same chain of transmitters in these words:He (the Messenger of Allah) said: Allah divided the Qur'an into three parts, and he made:" Say: He, Allah is One." one part out of the (three) parts of the Qur'an

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 6 · The Book of Prayer - Travellers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।