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सहीह मुस्लिम

नंबर 1877

नंबर 1877किताब 6, नंबर 305अरबी नंबरिंग 806
حَدَّثَنَا حَسَنُ بْنُ الرَّبِيعِ، وَأَحْمَدُ بْنُ جَوَّاسٍ الْحَنَفِيُّ، قَالاَ حَدَّثَنَا أَبُو الأَحْوَصِ، عَنْ عَمَّارِ بْنِ رُزَيْقٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عِيسَى، عَنْ سَعِيدِ بْنِ جُبَيْرٍ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، قَالَ بَيْنَمَا جِبْرِيلُ قَاعِدٌ عِنْدَ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم سَمِعَ نَقِيضًا مِنْ فَوْقِهِ فَرَفَعَ رَأْسَهُ فَقَالَ هَذَا بَابٌ مِنَ السَّمَاءِ فُتِحَ الْيَوْمَ لَمْ يُفْتَحْ قَطُّ إِلاَّ الْيَوْمَ فَنَزَلَ مِنْهُ مَلَكٌ فَقَالَ هَذَا مَلَكٌ نَزَلَ إِلَى الأَرْضِ لَمْ يَنْزِلْ قَطُّ إِلاَّ الْيَوْمَ فَسَلَّمَ وَقَالَ أَبْشِرْ بِنُورَيْنِ أُوتِيتَهُمَا لَمْ يُؤْتَهُمَا نَبِيٌّ قَبْلَكَ فَاتِحَةُ الْكِتَابِ وَخَوَاتِيمُ سُورَةِ الْبَقَرَةِ لَنْ تَقْرَأَ بِحَرْفٍ مِنْهُمَا إِلاَّ أُعْطِيتَهُ ‏.‏
अब्दुल्लाह बिन अब्बास (रज़ियल्लाहु अन्हुमा) कहते हैं कि जिबरील (अलैहिस्सलाम) नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास बैठे हुए थे कि ऊपर से एक आवाज़ सुनी, तो अपना सिर उठाया और फ़रमायाः यह आकाश का एक द्वार है, जो आज खोला गया है और इससे पूर्व कभी खोला नहीं गया था और उससे एक फ़रिश्ता उतरा। तथा (जिबरील ने आगे) कहा : यह धरती पर उतरने वाला एक फरिश्ता है, जो इससे पूर्व कभी नहीं उतरा था। उसने सलाम किया और कहाः दो नूर की शुभसूचना लीजिए, जो आपको दिए गए हैं आपसे पूर्व किसी नबी को नहीं दिए गए थे। दोनों नूर हैं, सूरा फ़ातिहा और सूरा बक़रा की अंतिम आयतें। इनका जो भी शब्द आप पढ़ेंगे, उनके अंदर माँगी गई चीज़ें आपको दी जाएँगी।

तर्जुमा: HadeethEnc.comइसकी तशरीह

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

जहाँ तर्जुमा शुदा नबवी हदीसों के इनसाइक्लोपीडिया (HadeethEnc.com) में किसी रिवायत का हूबहू टेक्स्ट मौजूद है, वहाँ उसका तर्जुमा उसी रिवायत के नीचे स्रोत के नाम के साथ दिखाया गया है। दोनों को प्रोग्राम के ज़रिए, सिर्फ़ अरबी टेक्स्ट की बुनियाद पर जोड़ा गया है: इनसाइक्लोपीडिया की हदीस का पूरा टेक्स्ट, उसमें दर्ज सहाबी के नाम समेत, रिवायत का आख़िरी हिस्सा है, हर्फ़-ब-हर्फ़। इस जोड़ को किसी ने नहीं जाँचा है, और सबील के जायज़ाकारों ने तर्जुमे की जाँच नहीं की है। असल टेक्स्ट अरबी है।

किताब 6 · The Book of Prayer - Travellers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।