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सहीह मुस्लिम

नंबर 1863

नंबर 1863किताब 6, नंबर 291अरबी नंबरिंग 798.02
وَحَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي عَدِيٍّ، عَنْ سَعِيدٍ، ح وَحَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ، بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، عَنْ هِشَامٍ الدَّسْتَوَائِيِّ، كِلاَهُمَا عَنْ قَتَادَةَ، بِهَذَا الإِسْنَادِ ‏.‏ وَقَالَ فِي حَدِيثِ وَكِيعٍ ‏ "‏ وَالَّذِي يَقْرَأُ وَهُوَ يَشْتَدُّ عَلَيْهِ لَهُ أَجْرَانِ ‏"‏ ‏.‏
This hadith has been reported with the same chain of transmitters by Qatada except with this change:" He who finds it hard (to recite the Qur'an) will have a double reward

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 6 · The Book of Prayer - Travellers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।