सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह मुस्लिम

नंबर 1855

नंबर 1855किताब 6, नंबर 283अरबी नंबरिंग 794.03
وَحَدَّثَنَاهُ يَحْيَى بْنُ حَبِيبٍ الْحَارِثِيُّ، حَدَّثَنَا خَالِدُ بْنُ الْحَارِثِ، ح وَحَدَّثَنَا عُبَيْدُ، اللَّهِ بْنُ مُعَاذٍ حَدَّثَنَا أَبِي قَالاَ، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، بِهَذَا الإِسْنَادِ نَحْوَهُ وَفِي حَدِيثِ خَالِدِ بْنِ الْحَارِثِ قَالَ عَلَى رَاحِلَةٍ يَسِيرُ وَهُوَ يَقْرَأُ سُورَةَ الْفَتْحِ ‏.‏
This hadlth has been narrated by Khalid al-Harith with the same chain of transmitters (with these words):(The Holy Prophet) was reciting Surat al-Fath as he was travelling on his mount

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 6 · The Book of Prayer - Travellers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।