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सहीह मुस्लिम

नंबर 1848

नंबर 1848किताब 6, नंबर 276अरबी नंबरिंग 793.01
وَحَدَّثَنِي ابْنُ أَخِي ابْنِ وَهْبٍ، حَدَّثَنَا عَمِّي عَبْدُ اللَّهِ بْنُ وَهْبٍ، أَخْبَرَنِي عُمَرُ بْنُ، مَالِكٍ وَحَيْوَةُ بْنُ شُرَيْحٍ عَنِ ابْنِ الْهَادِ، بِهَذَا الإِسْنَادِ ‏.‏ مِثْلَهُ سَوَاءً وَقَالَ إِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏.‏ وَلَمْ يَقُلْ سَمِعَ ‏.‏
This hadith has been narrated with the same chain of transmitters by Ibn al-Had except this that Abu Huraira reported Allah's Messenger (ﷺ) as saying and he did not say:" He heard it

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 6 · The Book of Prayer - Travellers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।