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सहीह मुस्लिम

नंबर 1846

नंबर 1846किताब 6, नंबर 274अरबी नंबरिंग 792.02
وَحَدَّثَنِي حَرْمَلَةُ بْنُ يَحْيَى، أَخْبَرَنَا ابْنُ وَهْبٍ، أَخْبَرَنِي يُونُسُ، ح وَحَدَّثَنِي يُونُسُ، بْنُ عَبْدِ الأَعْلَى أَخْبَرَنَا ابْنُ وَهْبٍ، أَخْبَرَنِي عَمْرٌو، كِلاَهُمَا عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، بِهَذَا الإِسْنَادِ قَالَ ‏ "‏ كَمَا يَأْذَنُ لِنَبِيٍّ يَتَغَنَّى بِالْقُرْآنِ ‏"‏ ‏.‏
This hadith has been narrated by Ibn Shihab with the same chain of transmitters with words:" As He listens to a Prophet reciting the Qur'an in a sweet voice

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 6 · The Book of Prayer - Travellers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।