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सहीह मुस्लिम

नंबर 1837

नंबर 1837किताब 6, नंबर 265अरबी नंबरिंग 788.01
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، وَأَبُو كُرَيْبٍ قَالاَ حَدَّثَنَا أَبُو أُسَامَةَ، عَنْ هِشَامٍ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ عَائِشَةَ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم سَمِعَ رَجُلاً يَقْرَأُ مِنَ اللَّيْلِ فَقَالَ ‏ "‏ يَرْحَمُهُ اللَّهُ لَقَدْ أَذْكَرَنِي كَذَا وَكَذَا آيَةً كُنْتُ أَسْقَطْتُهَا مِنْ سُورَةِ كَذَا وَكَذَا ‏"‏ ‏.‏
A'isha reported that the Messenger of Allah (ﷺ) heard a person reciting the Qur'an at night. Upon this he said:May Allah show mercy to him; he has reminded me of such and such a verse which I had missed in such and such a surah

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 6 · The Book of Prayer - Travellers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।