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सहीह मुस्लिम

नंबर 1835

नंबर 1835किताब 6, नंबर 263अरबी नंबरिंग 786
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ نُمَيْرٍ، ح وَحَدَّثَنَا ابْنُ نُمَيْرٍ، حَدَّثَنَا أَبِي ح، وَحَدَّثَنَا أَبُو كُرَيْبٍ، حَدَّثَنَا أَبُو أُسَامَةَ، جَمِيعًا عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ، ح وَحَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ، بْنُ سَعِيدٍ - وَاللَّفْظُ لَهُ - عَنْ مَالِكِ بْنِ أَنَسٍ، عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ عَائِشَةَ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ إِذَا نَعَسَ أَحَدُكُمْ فِي الصَّلاَةِ فَلْيَرْقُدْ حَتَّى يَذْهَبَ عَنْهُ النَّوْمُ فَإِنَّ أَحَدَكُمْ إِذَا صَلَّى وَهُوَ نَاعِسٌ لَعَلَّهُ يَذْهَبُ يَسْتَغْفِرُ فَيَسُبُّ نَفْسَهُ ‏"‏ ‏.‏
A'isha reported Allah's Apostle (ﷺ) as saying:When anyone amongst you dozes in prayer, he should sleep, till sleep is gone, for when one of you prays while dozing he does not know whether he may be asking pardon or vilifying himself

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 6 · The Book of Prayer - Travellers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।