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सहीह मुस्लिम

नंबर 1826

नंबर 1826किताब 6, नंबर 254अरबी नंबरिंग 781.02
وَحَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ حَاتِمٍ، حَدَّثَنَا بَهْزٌ، حَدَّثَنَا وُهَيْبٌ، حَدَّثَنَا مُوسَى بْنُ عُقْبَةَ، قَالَ سَمِعْتُ أَبَا النَّضْرِ، عَنْ بُسْرِ بْنِ سَعِيدٍ، عَنْ زَيْدِ بْنِ ثَابِتٍ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم اتَّخَذَ حُجْرَةً فِي الْمَسْجِدِ مِنْ حَصِيرٍ فَصَلَّى رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فِيهَا لَيَالِيَ حَتَّى اجْتَمَعَ إِلَيْهِ نَاسٌ ‏.‏ فَذَكَرَ نَحْوَهُ وَزَادَ فِيهِ ‏ "‏ وَلَوْ كُتِبَ عَلَيْكُمْ مَا قُمْتُمْ بِهِ ‏"‏ ‏.‏
Zaid b. Thabit reported that the Messenger of Allah (ﷺ) made an apartment in the mosque of mats, and he observed in it prayers for many nights till people began to gather around him, and the rest of the hadith is the same but with this addition:" Had this (Nafl) prayer become obligatory for you, you would not be able to observe it

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 6 · The Book of Prayer - Travellers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।