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सहीह मुस्लिम

नंबर 1820

नंबर 1820किताब 6, नंबर 248अरबी नंबरिंग 777.01
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، حَدَّثَنَا يَحْيَى، عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ، قَالَ أَخْبَرَنِي نَافِعٌ، عَنِ ابْنِ، عُمَرَ عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ اجْعَلُوا مِنْ صَلاَتِكُمْ فِي بُيُوتِكُمْ وَلاَ تَتَّخِذُوهَا قُبُورًا ‏"‏ ‏.‏
Ibn 'Umar reported Allah's Apostle (ﷺ) as saying:Observe some of your prayers in your houses and do not make them graves

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 6 · The Book of Prayer - Travellers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।