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सहीह मुस्लिम

नंबर 1817

नंबर 1817किताब 6, नंबर 245अरबी नंबरिंग 774
حَدَّثَنَا عُثْمَانُ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، وَإِسْحَاقُ، قَالَ عُثْمَانُ حَدَّثَنَا جَرِيرٌ، عَنْ مَنْصُورٍ، عَنْ أَبِي وَائِلٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ، قَالَ ذُكِرَ عِنْدَ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم رَجُلٌ نَامَ لَيْلَةً حَتَّى أَصْبَحَ قَالَ ‏"‏ ذَاكَ رَجُلٌ بَالَ الشَّيْطَانُ فِي أُذُنَيْهِ ‏"‏ ‏.‏ أَوْ قَالَ ‏"‏ فِي أُذُنِهِ ‏"‏ ‏.‏
Abdullah (b. Mas'ud) reported that a mention was made of a man who slept the whole night till morning. He (the Holy Prophet) remarked:That is a man in whose ears (or in whose ear) the devil urinated

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 6 · The Book of Prayer - Travellers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।