सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह मुस्लिम

नंबर 1759

नंबर 1759किताब 6, नंबर 188अरबी नंबरिंग 753
وَحَدَّثَنِي زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الصَّمَدِ، حَدَّثَنَا هَمَّامٌ، حَدَّثَنَا قَتَادَةُ، عَنْ أَبِي مِجْلَزٍ، قَالَ سَأَلْتُ ابْنَ عَبَّاسٍ عَنِ الْوِتْرِ، فَقَالَ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ ‏"‏ رَكْعَةٌ مِنْ آخِرِ اللَّيْلِ ‏"‏ ‏.‏ وَسَأَلْتُ ابْنَ عُمَرَ فَقَالَ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ ‏"‏ رَكْعَةٌ مِنْ آخِرِ اللَّيْلِ ‏"‏ ‏.‏
Abu Mijlaz reported:I asked Ibn 'Abbas about the Witr prayer. He said: I heard the Messenger of Allah (ﷺ) as saying: It is a rak'ah at the end of the night prayer

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 6 · The Book of Prayer - Travellers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।