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सहीह मुस्लिम

नंबर 1756

नंबर 1756किताब 6, नंबर 185अरबी नंबरिंग 751.03
وَحَدَّثَنِي هَارُونُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ، حَدَّثَنَا حَجَّاجُ بْنُ مُحَمَّدٍ، قَالَ قَالَ ابْنُ جُرَيْجٍ أَخْبَرَنِي نَافِعٌ، أَنَّ ابْنَ عُمَرَ، كَانَ يَقُولُ مَنْ صَلَّى مِنَ اللَّيْلِ فَلْيَجْعَلْ آخِرَ صَلاَتِهِ وِتْرًا قَبْلَ الصُّبْحِ كَذَلِكَ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَأْمُرُهُمْ ‏.‏
Nafi' reported Ibn 'Umar as saying:He who observed the night prayer should make Witr the end of his prayer before dawn. The Messenger of Allah (ﷺ) used to order them thus

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 6 · The Book of Prayer - Travellers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।