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सहीह मुस्लिम

नंबर 1750

नंबर 1750किताब 6, नंबर 179अरबी नंबरिंग 749.03
وَحَدَّثَنِي حَرْمَلَةُ بْنُ يَحْيَى، حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ وَهْبٍ، أَخْبَرَنِي عَمْرٌو، أَنَّ ابْنَ شِهَابٍ، حَدَّثَهُ أَنَّ سَالِمَ بْنَ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ وَحُمَيْدَ بْنَ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ عَوْفٍ حَدَّثَاهُ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ، أَنَّهُ قَالَ قَامَ رَجُلٌ فَقَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ كَيْفَ صَلاَةُ اللَّيْلِ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ صَلاَةُ اللَّيْلِ مَثْنَى مَثْنَى فَإِذَا خِفْتَ الصُّبْحَ فَأَوْتِرْ بِوَاحِدَةٍ ‏"‏ ‏.‏
Abdullah b. 'Umar reported:A man stood up and said. Messenger of Allah, how is the night prayer? The Messenger of Allah (ﷺ) said: The night prayer consists of pair, but if you apprehend the rise of dawn, make it odd number by observing one rak'ah

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 6 · The Book of Prayer - Travellers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।