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सहीह मुस्लिम

नंबर 1732

नंबर 1732किताब 6, नंबर 161अरबी नंबरिंग 743.01
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، وَنَصْرُ بْنُ عَلِيٍّ، وَابْنُ أَبِي عُمَرَ، قَالَ أَبُو بَكْرٍ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ، عَنْ أَبِي النَّضْرِ، عَنْ أَبِي سَلَمَةَ، عَنْ عَائِشَةَ، قَالَتْ كَانَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم إِذَا صَلَّى رَكْعَتَىِ الْفَجْرِ فَإِنْ كُنْتُ مُسْتَيْقِظَةً حَدَّثَنِي وَإِلاَّ اضْطَجَعَ ‏.‏
A'isha reported:When the Messenger of Allah (ﷺ) had prayed the two rak'ahs (Sunan) of the dawn prayer, he would talk to me if I was awake, otherwise he would lie down

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 6 · The Book of Prayer - Travellers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।