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सहीह मुस्लिम

नंबर 1730

नंबर 1730किताब 6, नंबर 159अरबी नंबरिंग 741
حَدَّثَنِي هَنَّادُ بْنُ السَّرِيِّ، حَدَّثَنَا أَبُو الأَحْوَصِ، عَنْ أَشْعَثَ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ مَسْرُوقٍ، قَالَ سَأَلْتُ عَائِشَةَ عَنْ عَمَلِ، رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَقَالَتْ كَانَ يُحِبُّ الدَّائِمَ ‏.‏ قَالَ قُلْتُ أَىَّ حِينٍ كَانَ يُصَلِّي فَقَالَتْ كَانَ إِذَا سَمِعَ الصَّارِخَ قَامَ فَصَلَّى ‏.‏
Masruq is reported to have asked 'A'isha about the action (most pleasing to) the Messenger of Allah (ﷺ). She said:He (the Holy Prophet) loved (that action) which one keeps on doing regularly. I said (to 'A'isha): When did he pray (at night)? She replied: When he heard the cock crow, he got up and observed prayer

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 6 · The Book of Prayer - Travellers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।