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सहीह मुस्लिम

नंबर 1727

नंबर 1727किताब 6, नंबर 156अरबी नंबरिंग 738.05
حَدَّثَنَا ابْنُ نُمَيْرٍ، حَدَّثَنَا أَبِي، حَدَّثَنَا حَنْظَلَةُ، عَنِ الْقَاسِمِ بْنِ مُحَمَّدٍ، قَالَ سَمِعْتُ عَائِشَةَ، تَقُولُ كَانَتْ صَلاَةُ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم مِنَ اللَّيْلِ عَشَرَ رَكَعَاتٍ وَيُوتِرُ بِسَجْدَةٍ وَيَرْكَعُ رَكْعَتَىِ الْفَجْرِ فَتِلْكَ ثَلاَثَ عَشْرَةَ رَكْعَةً ‏.‏
It is reported on the authority of 'A'isha that the prayer of Allah's Messenger (ﷺ) in the night consisted of ten rak'ahs. He observed a Witr and two rak'ahs (of Sunan) of the dawn prayer, and thus the total comes to thirteen rak'ahs

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 6 · The Book of Prayer - Travellers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।