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सहीह मुस्लिम

नंबर 1724

नंबर 1724किताब 6, नंबर 153अरबी नंबरिंग 738.02
وَحَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي عَدِيٍّ، حَدَّثَنَا هِشَامٌ، عَنْ يَحْيَى، عَنْ أَبِي سَلَمَةَ، قَالَ سَأَلْتُ عَائِشَةَ عَنْ صَلاَةِ، رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَقَالَتْ كَانَ يُصَلِّي ثَلاَثَ عَشْرَةَ رَكْعَةً يُصَلِّي ثَمَانَ رَكَعَاتٍ ثُمَّ يُوتِرُ ثُمَّ يُصَلِّي رَكْعَتَيْنِ وَهُوَ جَالِسٌ فَإِذَا أَرَادَ أَنْ يَرْكَعَ قَامَ فَرَكَعَ ثُمَّ يُصَلِّي رَكْعَتَيْنِ بَيْنَ النِّدَاءِ وَالإِقَامَةِ مِنْ صَلاَةِ الصُّبْحِ ‏.‏
Abu Salama asked 'A'isha about the prayer of the Messenger of Allah (ﷺ) She said:He observed thirteen rak'ahs (in the night prayer). He observed eight rak'ahs and would then observe Witr and then observe two rak'ahs sitting, and when he wanted to bow he stood up and then bowed down, and then observed two rak'ahs in between the Adhan and lqama of the dawn prayer

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 6 · The Book of Prayer - Travellers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।