सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह मुस्लिम

नंबर 1691

नंबर 1691किताब 6, नंबर 121अरबी नंबरिंग 727.01
وَحَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ، حَدَّثَنَا الْفَزَارِيُّ، - يَعْنِي مَرْوَانَ بْنَ مُعَاوِيَةَ - عَنْ عُثْمَانَ بْنِ حَكِيمٍ الأَنْصَارِيِّ، قَالَ أَخْبَرَنِي سَعِيدُ بْنُ يَسَارٍ، أَنَّ ابْنَ عَبَّاسٍ، أَخْبَرَهُ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم كَانَ يَقْرَأُ فِي رَكْعَتَىِ الْفَجْرِ فِي الأُولَى مِنْهُمَا ‏{‏ قُولُوا آمَنَّا بِاللَّهِ وَمَا أُنْزِلَ إِلَيْنَا‏}‏ الآيَةَ الَّتِي فِي الْبَقَرَةِ وَفِي الآخِرَةِ مِنْهُمَا ‏{‏ آمَنَّا بِاللَّهِ وَاشْهَدْ بِأَنَّا مُسْلِمُونَ‏}‏
Ibn 'Abbas reported that the Messenger of Allah (ﷺ) used to recite in first of the two (supererogatory) rak'ahs of the dawn:"Say: We believed in Allah and what was revealed to us..." verse 136 from Surah Baqara, and in the second of the two: "I believe in Allah and I bear testimony that we are Muslims" (iii)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 6 · The Book of Prayer - Travellers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।