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सहीह मुस्लिम

नंबर 1689

नंबर 1689किताब 6, नंबर 119अरबी नंबरिंग 725.02
وَحَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ حَبِيْبٍ، حَدَّثَنَا مُعْتَمِرٌ، قَالَ قَالَ أَبِي حَدَّثَنَا قَتَادَةُ، عَنْ زُرَارَةَ، عَنْ سَعْدِ بْنِ هِشَامٍ، عَنْ عَائِشَةَ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم أَنَّهُ قَالَ فِي شَأْنِ الرَّكْعَتَيْنِ عِنْدَ طُلُوعِ الْفَجْرِ ‏ "‏ لَهُمَا أَحَبُّ إِلَىَّ مِنَ الدُّنْيَا جَمِيعًا ‏"‏ ‏.‏
A'isha reported that the Messenger of Allah (ﷺ) said about the two (supererogatory) rak'ahs of the dawn:They are dearer to me than the whole world

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 6 · The Book of Prayer - Travellers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।