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सहीह मुस्लिम

नंबर 1661

नंबर 1661किताब 6, नंबर 91अरबी नंबरिंग 717.02
وَحَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ مُعَاذٍ، حَدَّثَنَا أَبِي، حَدَّثَنَا كَهْمَسُ بْنُ الْحَسَنِ الْقَيْسِيُّ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ شَقِيقٍ، قَالَ قُلْتُ لِعَائِشَةَ أَكَانَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم يُصَلِّي الضُّحَى قَالَتْ لاَ إِلاَّ أَنْ يَجِيءَ مِنْ مَغِيبِهِ
Abdullah b. Shaqiq reported:I aksed 'A'isha whether the Messenger of Allah (ﷺ) used to observe the forenoon prayer. She said: No, except when he came back from a journey

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 6 · The Book of Prayer - Travellers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।