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सहीह मुस्लिम

नंबर 1605

नंबर 1605किताब 6, नंबर 36अरबी नंबरिंग 699.02
وَحَدَّثَنِيهِ أَبُو كَامِلٍ الْجَحْدَرِيُّ، حَدَّثَنَا حَمَّادٌ، - يَعْنِي ابْنَ زَيْدٍ - عَنْ عَبْدِ الْحَمِيدِ، قَالَ سَمِعْتُ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ الْحَارِثِ، قَالَ خَطَبَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عَبَّاسٍ فِي يَوْمٍ ذِي رَدْغٍ ‏.‏ وَسَاقَ الْحَدِيثَ بِمَعْنَى حَدِيثِ ابْنِ عُلَيَّةَ وَلَمْ يَذْكُرِ الْجُمُعَةَ وَقَالَ قَدْ فَعَلَهُ مَنْ هُوَ خَيْرٌ مِنِّي ‏.‏ يَعْنِي النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم وَقَالَ أَبُو كَامِلٍ حَدَّثَنَا حَمَّادٌ، عَنْ عَاصِمٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الْحَارِثِ، بِنَحْوِهِ ‏.‏
Abd al-Hamid reported:I heard 'Abdullah b. al-Harith say: 'Abdullah b. 'Abbas addressed us on a rainy day, and the rest of the hadith is the same, but he made no mention of Jumu'a prayer, and added: He who did it (who commanded us to say prayer in our houses), i. e. the Messenger of Allah (ﷺ), is better than I

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 6 · The Book of Prayer - Travellers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।