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सहीह मुस्लिम

नंबर 1592

नंबर 1592किताब 6, नंबर 23अरबी नंबरिंग 694.03
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا أَبُو أُسَامَةَ، حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ، عَنْ نَافِعٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، قَالَ صَلَّى رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم بِمِنًى رَكْعَتَيْنِ وَأَبُو بَكْرٍ بَعْدَهُ وَعُمَرُ بَعْدَ أَبِي بَكْرٍ وَعُثْمَانُ صَدْرًا مِنْ خِلاَفَتِهِ ثُمَّ إِنَّ عُثْمَانَ صَلَّى بَعْدُ أَرْبَعًا ‏.‏ فَكَانَ ابْنُ عُمَرَ إِذَا صَلَّى مَعَ الإِمَامِ صَلَّى أَرْبَعًا وَإِذَا صَلاَّهَا وَحْدَهُ صَلَّى رَكْعَتَيْنِ ‏.‏
Ibn 'Umar reported:The Messenger of Allah (ﷺ) said two rak'ahs at Mina, and Abu Bakr after him, and 'Umar after Abu Bakr, and 'Uthman at the beginning of his caliphate; then 'Uthman observed four rak'ahs, and when Ibn 'Umar prayed with the Imam, he said four rak'ahs, but when he observed prayer alone, he said two rak'ahs

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 6 · The Book of Prayer - Travellers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।