सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह मुस्लिम

नंबर 1581

नंबर 1581किताब 6, नंबर 12अरबी नंबरिंग 690.01
حَدَّثَنَا خَلَفُ بْنُ هِشَامٍ، وَأَبُو الرَّبِيعِ الزَّهْرَانِيُّ، وَقُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ، قَالُوا حَدَّثَنَا حَمَّادٌ، وَهُوَ ابْنُ زَيْدٍ ح وَحَدَّثَنِي زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، وَيَعْقُوبُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، قَالاَ حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ، كِلاَهُمَا عَنْ أَيُّوبَ، عَنْ أَبِي قِلاَبَةَ، عَنْ أَنَسٍ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم صَلَّى الظُّهْرَ بِالْمَدِينَةِ أَرْبَعًا وَصَلَّى الْعَصْرَ بِذِي الْحُلَيْفَةِ رَكْعَتَيْنِ ‏.‏
Anas reported:The Messenger of Allah (ﷺ) said four rak'ahs in the noon prayer while at Medina, but he offered two rak'ahs in the afternoon prayer at Dhu'l-Hulaifa

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 6 · The Book of Prayer - Travellers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।