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सहीह मुस्लिम

नंबर 7550

नंबर 7550किताब 56, नंबर 28अरबी नंबरिंग 3027
حَدَّثَنِي يُونُسُ بْنُ عَبْدِ الأَعْلَى الصَّدَفِيُّ، أَخْبَرَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ وَهْبٍ، أَخْبَرَنِي عَمْرُو، بْنُ الْحَارِثِ عَنْ سَعِيدِ بْنِ أَبِي هِلاَلٍ، عَنْ عَوْنِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ، عَنْ أَبِيهِ، أَنَّ ابْنَ مَسْعُودٍ، قَالَ مَا كَانَ بَيْنَ إِسْلاَمِنَا وَبَيْنَ أَنْ عَاتَبَنَا اللَّهُ بِهَذِهِ الآيَةِ ‏{‏ أَلَمْ يَأْنِ لِلَّذِينَ آمَنُوا أَنْ تَخْشَعَ قُلُوبُهُمْ لِذِكْرِ اللَّهِ‏}‏ إِلاَّ أَرْبَعُ سِنِينَ ‏.‏
Ibn Mas'ud said:Since our acceptance of Islam and the revelation of this verse in which Allah has shown annoyance to us:" Has not the time yet come for the believers that their hearts should be humble for the remembrance of Allah?" (lvii. 16), there was a gap of four years

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 56 · The Book of Commentary on the Qur'an

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।