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सहीह मुस्लिम

नंबर 7529

नंबर 7529किताब 56, नंबर 7अरबी नंबरिंग 3018.02
وَحَدَّثَنَا الْحَسَنُ الْحُلْوَانِيُّ، وَعَبْدُ بْنُ حُمَيْدٍ، جَمِيعًا عَنْ يَعْقُوبَ بْنِ إِبْرَاهِيمَ بْنِ سَعْدٍ، حَدَّثَنَا أَبِي، عَنْ صَالِحٍ، عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، أَخْبَرَنِي عُرْوَةُ، أَنَّهُ سَأَلَ عَائِشَةَ عَنْ قَوْلِ اللَّهِ، ‏{‏وَإِنْ خِفْتُمْ أَنْ لاَ، تُقْسِطُوا فِي الْيَتَامَى‏}‏ وَسَاقَ الْحَدِيثَ بِمِثْلِ حَدِيثِ يُونُسَ عَنِ الزُّهْرِيِّ وَزَادَ فِي آخِرِهِ مِنْ أَجْلِ رَغْبَتِهِمْ عَنْهُنَّ إِذَا كُنَّ قَلِيلاَتِ الْمَالِ وَالْجَمَالِ ‏.‏
Urwa reported that he asked 'A'isha about the words of Allah:" If you fear that you will not be able to observe equity in case of orphan girls" ; the rest of the hadith is the same but with a slight variation of wording

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 56 · The Book of Commentary on the Qur'an

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।