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सहीह मुस्लिम

नंबर 7507

नंबर 7507किताब 55, नंबर 89अरबी नंबरिंग 3002.03
وَحَدَّثَنَاهُ مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، وَابْنُ، بَشَّارٍ قَالاَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ، عَنْ سُفْيَانَ، عَنْ مَنْصُورٍ، ح وَحَدَّثَنَا عُثْمَانُ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا الأَشْجَعِيُّ، عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ عُبَيْدِ الرَّحْمَنِ عَنْ سُفْيَانَ الثَّوْرِيِّ، عَنِ الأَعْمَشِ، وَمَنْصُورٍ، عَنْ إِبْرَاهِيمَ، عَنْ هَمَّامٍ، عَنِ الْمِقْدَادِ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم بِمِثْلِهِ ‏.‏
This hadith has been narrated on the authority of Miqdad through another chain of transmitters

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 55 · The Book of Zuhd and Softening of Hearts

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।