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सहीह मुस्लिम

नंबर 7503

नंबर 7503किताब 55, नंबर 85अरबी नंबरिंग 3000.03
وَحَدَّثَنِيهِ عَمْرٌو النَّاقِدُ، حَدَّثَنَا هَاشِمُ بْنُ الْقَاسِمِ، ح وَحَدَّثَنَاهُ أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا شَبَابَةُ بْنُ سَوَّارٍ، كِلاَهُمَا عَنْ شُعْبَةَ، بِهَذَا الإِسْنَادِ ‏.‏ نَحْوَ حَدِيثِ يَزِيدَ بْنِ زُرَيْعٍ وَلَيْسَ فِي حَدِيثِهِمَا فَقَالَ رَجُلٌ مَا مِنْ رَجُلٍ بَعْدَ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم أَفْضَلُ مِنْهُ ‏.‏
his hadith has been transmitted on the authority of Shu'ba with a slight variation of wording

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 55 · The Book of Zuhd and Softening of Hearts

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।