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सहीह मुस्लिम

नंबर 7491

नंबर 7491किताब 55, नंबर 74अरबी नंबरिंग 2995.01
حَدَّثَنِي أَبُو غَسَّانَ الْمِسْمَعِيُّ، مَالِكُ بْنُ عَبْدِ الْوَاحِدِ حَدَّثَنَا بِشْرُ بْنُ الْمُفَضَّلِ، حَدَّثَنَا سُهَيْلُ بْنُ أَبِي صَالِحٍ، قَالَ سَمِعْتُ ابْنًا، لأَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ يُحَدِّثُ أَبِي عَنْ أَبِيهِ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ إِذَا تَثَاوَبَ أَحَدُكُمْ فَلْيُمْسِكْ بِيَدِهِ عَلَى فِيهِ فَإِنَّ الشَّيْطَانَ يَدْخُلُ ‏"‏ ‏.‏
The son of Abu Said al-Khudri reported on the authority of his father that Allah's Messenger (ﷺ) said:When one of you yawns, he should keep his mouth shut with the help of his hand, for it is the devil that enters therein

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 55 · The Book of Zuhd and Softening of Hearts

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।