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सहीह मुस्लिम

नंबर 7481

नंबर 7481किताब 55, नंबर 64अरबी नंबरिंग 2988.01
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ، حَدَّثَنَا بَكْرٌ، - يَعْنِي ابْنَ مُضَرَ - عَنِ ابْنِ الْهَادِ، عَنْ مُحَمَّدِ، بْنِ إِبْرَاهِيمَ عَنْ عِيسَى بْنِ طَلْحَةَ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، أَنَّهُ سَمِعَ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ ‏ "‏ إِنَّ الْعَبْدَ لَيَتَكَلَّمُ بِالْكَلِمَةِ يَنْزِلُ بِهَا فِي النَّارِ أَبْعَدَ مَا بَيْنَ الْمَشْرِقِ وَالْمَغْرِبِ ‏"‏ ‏.‏
Abu Huraira reported that he heard Allah's Messenger (ﷺ) as saying:The servant speaks words for which he is sent down to the Hell-Fire farther than the distance between the east and the west

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 55 · The Book of Zuhd and Softening of Hearts

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।