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सहीह मुस्लिम

नंबर 7474

नंबर 7474किताब 55, नंबर 57अरबी नंबरिंग 2984.02
وَحَدَّثَنَاهُ أَحْمَدُ بْنُ عَبْدَةَ الضَّبِّيُّ، أَخْبَرَنَا أَبُو دَاوُدَ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الْعَزِيزِ بْنُ أَبِي سَلَمَةَ، حَدَّثَنَا وَهْبُ بْنُ كَيْسَانَ، بِهَذَا الإِسْنَادِ غَيْرَ أَنَّهُ قَالَ ‏ "‏ وَأَجْعَلُ ثُلُثَهُ فِي الْمَسَاكِينِ وَالسَّائِلِينَ وَابْنِ السَّبِيلِ ‏"‏ ‏.‏
This hadith has been narrated on the authority of Wahb b. Kaisan with the same chain of transmitters but with this change that he said:" I earmark one-third for the poor, the needy and the wayfarers

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 55 · The Book of Zuhd and Softening of Hearts

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।