सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह मुस्लिम

नंबर 7471

नंबर 7471किताब 55, नंबर 54अरबी नंबरिंग 533.04
حَدَّثَنَا زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، وَمُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، كِلاَهُمَا عَنِ الضَّحَّاكِ، - قَالَ ابْنُ الْمُثَنَّى حَدَّثَنَا الضَّحَّاكُ بْنُ مَخْلَدٍ، - أَخْبَرَنَا عَبْدُ الْحَمِيدِ بْنُ جَعْفَرٍ، حَدَّثَنِي أَبِي، عَنْ مَحْمُودِ بْنِ لَبِيدٍ، أَنَّ عُثْمَانَ بْنَ عَفَّانَ، أَرَادَ بِنَاءَ الْمَسْجِدِ فَكَرِهَ النَّاسُ ذَلِكَ وَأَحَبُّوا أَنْ يَدَعَهُ عَلَى هَيْئَتِهِ فَقَالَ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ ‏ "‏ مَنْ بَنَى مَسْجِدًا لِلَّهِ بَنَى اللَّهُ لَهُ فِي الْجَنَّةِ مِثْلَهُ ‏"‏ ‏.‏
महमूद बिन लबीद रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है कि उसमान बिन अफ़्फ़ान रज़ियल्लाहु अनहु ने मस्जिद-ए-नबवी के दोबारा निर्माण का इरादा किया, तो लोगों ने इसे नापसंद किया। वह चाहते थे कि उसे उसकी असल हालत पर रहने दिया जाए। इसपर उन्होंने कहा : मैंने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को फ़रमाते हुए सुना है : "जिसने अल्लाह के लिए कोई घर बनाया, अल्लाह जन्नत में उसके लिए उसी जैसा घर बनाएगा।"

तर्जुमा: HadeethEnc.comइसकी तशरीह

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

जहाँ तर्जुमा शुदा नबवी हदीसों के इनसाइक्लोपीडिया (HadeethEnc.com) में किसी रिवायत का हूबहू टेक्स्ट मौजूद है, वहाँ उसका तर्जुमा उसी रिवायत के नीचे स्रोत के नाम के साथ दिखाया गया है। दोनों को प्रोग्राम के ज़रिए, सिर्फ़ अरबी टेक्स्ट की बुनियाद पर जोड़ा गया है: इनसाइक्लोपीडिया की हदीस का पूरा टेक्स्ट, उसमें दर्ज सहाबी के नाम समेत, रिवायत का आख़िरी हिस्सा है, हर्फ़-ब-हर्फ़। इस जोड़ को किसी ने नहीं जाँचा है, और सबील के जायज़ाकारों ने तर्जुमे की जाँच नहीं की है। असल टेक्स्ट अरबी है।

किताब 55 · The Book of Zuhd and Softening of Hearts

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।