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सहीह मुस्लिम

नंबर 7468

नंबर 7468किताब 55, नंबर 51अरबी नंबरिंग 2982
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مَسْلَمَةَ بْنِ قَعْنَبٍ، حَدَّثَنَا مَالِكٌ، عَنْ ثَوْرِ بْنِ زَيْدٍ، عَنْ أَبِي الْغَيْثِ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ السَّاعِي عَلَى الأَرْمَلَةِ وَالْمِسْكِينِ كَالْمُجَاهِدِ فِي سَبِيلِ اللَّهِ - وَأَحْسِبُهُ قَالَ - وَكَالْقَائِمِ لاَ يَفْتُرُ وَكَالصَّائِمِ لاَ يُفْطِرُ ‏"‏ ‏.‏
Abu Huraira reported that Allah's Messenger (ﷺ) said:One who makes efforts (for earning to be spent) on a widow and the destitute is like a striver in the cause of Allah, and I think he also said: He is like one who constantly stands for prayer and observes fast without breaking it

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 55 · The Book of Zuhd and Softening of Hearts

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।