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सहीह मुस्लिम

नंबर 7437

नंबर 7437किताब 55, नंबर 21अरबी नंबरिंग 2967.03
وَحَدَّثَنَا أَبُو كُرَيْبٍ، مُحَمَّدُ بْنُ الْعَلاَءِ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، عَنْ قُرَّةَ بْنِ خَالِدٍ، عَنْ حُمَيْدِ، بْنِ هِلاَلٍ عَنْ خَالِدِ بْنِ عُمَيْرٍ، قَالَ سَمِعْتُ عُتْبَةَ بْنَ غَزْوَانَ، يَقُولُ لَقَدْ رَأَيْتُنِي سَابِعَ سَبْعَةٍ مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم مَا طَعَامُنَا إِلاَّ وَرَقُ الْحُبْلَةِ حَتَّى قَرِحَتْ أَشْدَاقُنَا ‏.‏
Khalid b. Umair reported:I heard Uqba b. Ghazwan as saving: I found myself as the seventh amongst the seven who had been along with Allah's Messenger (ﷺ). We had nothing to eat but the leaves of hubla (a wild tree) until the corners of our mouths were injured

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 55 · The Book of Zuhd and Softening of Hearts

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।