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सहीह मुस्लिम

नंबर 7430

नंबर 7430किताब 55, नंबर 14अरबी नंबरिंग 2963.03
وَحَدَّثَنِي زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، حَدَّثَنَا جَرِيرٌ، ح وَحَدَّثَنَا أَبُو كُرَيْبٍ، حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ، ح وَحَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، - وَاللَّفْظُ لَهُ - حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ، وَوَكِيعٌ، عَنِ الأَعْمَشِ، عَنْ أَبِي صَالِحٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏"‏ انْظُرُوا إِلَى مَنْ أَسْفَلَ مِنْكُمْ وَلاَ تَنْظُرُوا إِلَى مَنْ هُوَ فَوْقَكُمْ فَهُوَ أَجْدَرُ أَنْ لاَ تَزْدَرُوا نِعْمَةَ اللَّهِ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو مُعَاوِيَةَ ‏"‏ عَلَيْكُمْ ‏"‏ ‏.‏
Abu Huraira reported Allah's Messenger (ﷺ) as saying:Look at those who stand at a lower level than you but don't look at those who stand at a higher level than you, for that is better-suited that you do not disparage Allah's favors. In the chain narrated by Abu Mu'awiya's he said: Upon you

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 55 · The Book of Zuhd and Softening of Hearts

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।