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सहीह मुस्लिम

नंबर 7419

नंबर 7419किताब 55, नंबर 3अरबी नंबरिंग 2957.02
حَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى الْعَنَزِيُّ، وَإِبْرَاهِيمُ بْنُ مُحَمَّدِ بْنِ عَرْعَرَةَ السَّامِيُّ، قَالاَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَهَّابِ، - يَعْنِيَانِ الثَّقَفِيَّ - عَنْ جَعْفَرٍ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ جَابِرٍ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم ‏.‏ بِمِثْلِهِ غَيْرَ أَنَّ فِي حَدِيثِ الثَّقَفِيِّ فَلَوْ كَانَ حَيًّا كَانَ هَذَا السَّكَكُ بِهِ عَيْبًا ‏.‏
Jabir reported Allah's Apostle (ﷺ) narrating a hadith like this with a slight variation of wording

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 55 · The Book of Zuhd and Softening of Hearts

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।