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सहीह मुस्लिम

नंबर 7412

नंबर 7412किताब 54, नंबर 173अरबी नंबरिंग 2953.03
حَدَّثَنَا هَارُونُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ، حَدَّثَنَا عَفَّانُ بْنُ مُسْلِمٍ، حَدَّثَنَا هَمَّامٌ، حَدَّثَنَا قَتَادَةُ، عَنْ أَنَسٍ، قَالَ مَرَّ غُلاَمٌ لِلْمُغِيرَةِ بْنِ شُعْبَةَ وَكَانَ مِنْ أَقْرَانِي فَقَالَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ إِنْ يُؤَخَّرْ هَذَا فَلَنْ يُدْرِكَهُ الْهَرَمُ حَتَّى تَقُومَ السَّاعَةُ ‏"‏ ‏.‏
Anas reported:A young boy of Mughira b. Shu'ba happened to pass by (the Holy Prophet) and he was of my age. Thereupon Allah's Apostle (ﷺ) said: If he lives long he would not grow very old till the Last Hour would come (to the old people of this generation)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 54 · The Book of Tribulations and Portents of the Last Hour

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।